IDFC First Bank ₹590 करोड़ फ्रॉड: चंडीगढ़ ब्रांच में बड़ा घोटाला, शेयर 20% क्रैश – क्या जानना जरूरी है
- Feb 24
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IDFC First Bank में ₹590 करोड़ का संदिग्ध फ्रॉड: एक ब्रांच की गड़बड़ी ने पूरे बैंक को हिला दिया
23 फरवरी 2026 को IDFC First Bank ने स्टॉक एक्सचेंज को सूचित किया कि उसके चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ अकाउंट्स में अनऑथराइज्ड ट्रांजेक्शन्स और फ्रॉड की वजह से लगभग ₹590 करोड़ का डिस्क्रेपेंसी पाया गया है। यह मामला बैंक के लिए बड़ा झटका है, खासकर जब हाल ही में Q3 में 48% प्रॉफिट ग्रोथ दिखाई थी।
मामला कैसे सामने आया? हरियाणा सरकार के एक डिपार्टमेंट ने अपने अकाउंट को क्लोज करने और बैलेंस ट्रांसफर करने की रिक्वेस्ट की। बैंक की जांच में पता चला कि क्लेम किया जा रहा बैलेंस बैंक के रिकॉर्ड्स से बहुत ज्यादा था। शुरुआत में ₹490 करोड़ का शॉर्टफॉल था, लेकिन आगे रिव्यू में अतिरिक्त ₹100 करोड़ की अनियमितताएं मिलीं, जिससे कुल अमाउंट ₹590 करोड़ तक पहुंच गया। बैंक का कहना है कि कुछ कर्मचारियों ने बाहर के लोगों के साथ मिलकर ये अनऑथराइज्ड एक्टिविटीज कीं।
बैंक और रेगुलेटर्स का रिस्पॉन्स
चार कर्मचारियों को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया।
KPMG से इंडिपेंडेंट फॉरेंसिक ऑडिट शुरू।
पुलिस कंप्लेंट और RBI को पूरी डिटेल दी गई।
CEO V Vaidyanathan ने इसे isolated incident बताया, टॉप मैनेजमेंट इन्वॉल्वमेंट से इनकार किया और कैपिटल बफर मजबूत होने का दावा किया।
RBI गवर्नर ने कहा कि ये सिस्टमिक इश्यू नहीं है, पब्लिक को चिंता करने की जरूरत नहीं।
हरियाणा सरकार ने सख्त कदम उठाया – बैंक को सभी गवर्नमेंट ट्रांजेक्शन्स से डी-एम्पैनल कर दिया। CM Nayab Singh Saini ने assurance दी कि पैसा रिकवर होगा और जांच चल रही है।
स्टॉक मार्केट पर तुरंत असर न्यूज के बाद 23 फरवरी को IDFC First Bank का शेयर 20% तक गिरा और लोअर सर्किट लगा।
इंट्राडे लो: ₹66.85 (पिछले क्लोज से करीब 20% करेक्शन)
क्लोजिंग: लगभग 16% डाउन पर ₹70.04
मार्केट कैप में एक दिन में ₹14,000 करोड़+ की गिरावट।
24 फरवरी को शुरुआती ट्रेड में थोड़ी रिकवरी दिखी (करीब 1% अप), लेकिन ब्रोकरेज फर्म्स जैसे Investec ने टारगेट प्राइस काट दिए और गवर्नेंस कंसर्न्स उठाए। कई एनालिस्ट्स का मानना है कि CASA डिपॉजिट्स और फ्यूचर ग्रोथ पर प्रेशर आ सकता है, लेकिन अगर रिकवरी अच्छी हुई तो लॉन्ग-टर्म रिकवरी पॉसिबल है।
आगे क्या? बैंक इंश्योरेंस कवर (करीब ₹35 करोड़) क्लेम कर सकता है, लेकिन ये बहुत कम है। फाइनल अमाउंट रिकंसिलिएशन, क्लेम वैलिडेशन और रिकवरी पर डिपेंड करेगा। ये केस बैंकिंग सेक्टर में इंटरनल कंट्रोल्स और ओवरसाइट की कमी को फिर से हाईलाइट करता है।
इन्वेस्टर्स के लिए सलाह: फिलहाल सतर्क रहें। जांच की रिपोर्ट और रिकवरी अपडेट्स का इंतजार करें। अगर होल्डिंग है तो पैनिक सेल न करें, लेकिन नए एंट्री के लिए क्लियर सिग्नल्स का वेट करें।
(सोर्स: बैंक की BSE/NSE फाइलिंग्स, Economic Times, The Hindu, Hindustan Times, Reuters, Livemint आदि। हमेशा प्राइमरी सोर्स से verify करें।)


